आळंदी में इंद्रायणी नदी में मरी मछलियां मिलीं, रसायन मिले सांडपानी छोड़ने का आरोप
तीर्थक्षेत्र आळंदी में इंद्रायणी नदी में बड़ी तादाद में मछलियां मरी हुई मिलीं, जिससे प्रदूषण का मुद्दा फिर उठ खड़ा हुआ है।
तीर्थक्षेत्र आळंदी की इंद्रायणी नदी में बड़ी संख्या में मछलियां मरी हुई पाई गई हैं, जिसके बाद नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का सवाल एक बार फिर सामने आ गया है। आळंदी नगरपरिषद के पानी सप्लाई सेंटर से उत्तर-दक्षिण दिशा में नदी के दोनों किनारों पर मरी हुई मछलियों के ढेर दिखने से वारकरी, भक्त और स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया है।
आळंदी में साठवण बांध से लेकर चिंबळी बांध तक के इलाके में बड़ी तादाद में मरी मछलियां मिलीं। लोगों का आरोप है कि पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका और पीएमआरडीए के इलाकों से सांडपानी और रसायन मिला पानी बिना ट्रीटमेंट किए सीधे इंद्रायणी नदी में छोड़ा जा रहा है। इस वजह से नदी के जीव-जंतुओं का वजूद खतरे में आ गया है, और हर साल आने वाली इस समस्या का पक्का हल निकालने की मांग जोर पकड़ रही है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि इंद्रायणी नदी के प्रदूषण के इस मामले में संबंधित स्थानीय स्वराज्य संस्थाएं और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ध्यान नहीं दे रहे हैं। तीर्थक्षेत्र के विकास की पृष्ठभूमि में पवित्र इंद्रायणी नदी का बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर मामला है, और नदी में छोड़े जा रहे सांडपानी व रसायन मिले पानी की तुरंत जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग उठ रही है।
अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से इंद्रायणी नदी के प्रदूषण को तुरंत रोकने के लिए कदम उठाने और नदी प्रदूषण की वजह बनने वाले लोगों पर कार्रवाई कर उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की गई है। इस बारे में पुणे जिलाधिकारी, पुणे विभागीय आयुक्त, पुणे प्रादेशिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पिंपरी-चिंचवड महापालिका आयुक्त और पीएमआरडीए आयुक्त को निवेदन सौंपा गया। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभवराज रौंदळ और पुणे जिला धार्मिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष अर्जुन मेदनकर ने निवेदन के जरिए प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा।
जांच के दौरान इंद्रायणी नदी में बड़ी तादाद में मछलियां मरी हुई मिलने की बात सामने आई। महासभा के पदाधिकारियों का दावा है कि पुंडलिक मंदिर से लेकर डुडुळगाव पुल तक नदी इलाके का मुआयना करने पर कई जगहों पर मरी मछलियां मिलीं। हर साल इंद्रायणी नदी में इस तरह मछलियों के मरने की घटनाएं होती हैं, और आरोप है कि नदी में आ रहे रसायन मिले पानी की वजह से ऐसा हो रहा है। मांग की गई है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर पक्का हल निकाले। अखिल भारत हिंदू महासभा ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वारकरी, भक्त और स्थानीय लोगों की ओर से तेज आंदोलन छेड़ा जाएगा।