गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:40 IST

आईटी विभाग के 200 करोड़ रुपये के घपले की जांच शुरू होते ही दक्षता प्रमुख का चार्ज छीना

मुंबई महापालिका के आयटी विभाग में करोड़ों के कथित आर्थिक गड़बड़ी की जांच कर रहे दक्षता विभाग प्रमुख से आयटी का जिम्मा अचानक हटा लिया गया, विपक्ष ने निलंबन की मांग की।

आईटी विभाग के 200 करोड़ रुपये के घपले की जांच शुरू होते ही दक्षता प्रमुख का चार्ज छीना
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई महापालिका के इन्फॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी यानी आयटी विभाग में करोड़ों रुपए की कथित आर्थिक गड़बड़ी की जड़ें खंगाल रहे दक्षता विभाग के प्रमुख एम. देवेंद्र सिंग से आयटी विभाग का चार्ज एकदम से छीन लिया गया है। पालिका के गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि यह कार्रवाई उन चहेते इंजीनियरों को बचाने के लिए की गई जो तबादले होने के बावजूद डेढ़ दशक से भी ज्यादा वक्त से इसी विभाग में जमे बैठे हैं। हालांकि दक्षता विभाग के निर्देश के बाद अब आयटी के डायरेक्टर क्षीरसागर ने इस मामले की जांच आगे भी जारी रखी है, जिससे प्रशासनिक हलकों में जबरदस्त हलचल मच गई है।

सूचना के अधिकार के तहत सामने आई जानकारी के मुताबिक, आयटी विभाग में मूल रूप से सिविल और मैकेनिकल बैकग्राउंड वाले तीन अफसर राजेंद्र फणसे, विलास कुंभारे और अमित गाडेकर 2007 से काम कर रहे हैं। इन पर गंभीर आरोप है कि आयटी क्षेत्र की कोई पढ़ाई या तकनीकी अनुभव न होने के बावजूद ये अफसर सैकड़ों करोड़ की टेंडर प्रक्रिया और मंजूरी में सीधे फैसले लेते रहे हैं।

डेटा सेंटर के नाम पर तिजोरी लूटने का आरोप भी लगाया जा रहा है। 2012 से 2015 के बीच पालिका के पूरे डेटा सेंटर और उपकरणों की देखभाल पर सिर्फ 66 करोड़ रुपए खर्च होते थे। लेकिन 2015 में अचानक पालिका ने अपना खुद का सुसज्जित डेटा सेंटर बंद करके प्राइवेट क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल करने का विवादित फैसला लिया। खर्च बचाने का दावा करते हुए असल में कंट्रोल एस को 50 करोड़, एबीएम को 35 करोड़ और ईएसडीएस को 22 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट दे दिए गए। इसके अलावा पालिका के मूल डेटा सेंटर की देखभाल के लिए अलग से 75 करोड़ और 23 करोड़ का एफएमएस कॉन्ट्रैक्ट निकालकर 2018 से 2021 के बीच कुल 198 करोड़ रुपए फूंक दिए जाने का आरोप है।

आयटी विभाग को लेकर कुछ भारी गड़बड़ियों की शिकायतें मिली थीं। इनकी जांच करके फाइनल रिपोर्ट एडिशनल कमिश्नर के पास सौंप दी गई है। आयटी विभाग की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर भी कुछ शिकायतें मिली हैं जिनकी जांच चल रही है, यह जानकारी आयटी विभाग के डायरेक्टर अरुण क्षीरसागर ने दी।

कमिश्नर के साफ निर्देश के बावजूद कुछ अफसरों का तबादला अब तक नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता संतोष दौंडकर के मुताबिक इन तबादलों के न होने के पीछे बड़ा आर्थिक खेल छिपा है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उनका कहना है कि ऐसे दोषी अफसरों पर तुरंत केस दर्ज होना चाहिए और इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने कमिश्नर और दक्षता विभाग के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

इस बड़े घोटाले को लेकर विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर प्रशासन को घेरा है। पेडणेकर ने मांग की है कि इस पूरे आर्थिक गड़बड़ी और प्रशासनिक फैसलों की गहराई से जांच हो और जिम्मेदार लोगों पर निलंबन की कार्रवाई की जाए।

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