कोथरूड में दिन दोपहर डेंगू की फॉगिंग, PMC ने हेल्थ इंस्पेक्टरों से लिखित जवाब मांगा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे महानगरपालिका ने कोथरुड के कुछ इलाकों में गलत समय पर मच्छर मारने की फॉगिंग होने पर हेल्थ इंस्पेक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
पुणे में डेंगू के मरीज अभी भी सामने आ रहे हैं और इसी बीच पुणे महानगरपालिका (PMC) पर खुद अपने बनाए नियम तोड़ने का आरोप लगा है। कोथरूड के कुछ इलाकों में गलत वक्त पर फॉगिंग होने की बात उठी तो प्रशासन ने संबंधित हेल्थ इंस्पेक्टरों से जवाब तलब कर लिया। यह मामला 4 नवंबर 2026 को खुलकर सामने आया।
बात मंगलवार, 3 नवंबर की है। रामबाग, LIC कॉलोनी, गिरिजा सोसाइटी और मोरे विद्यालय के आसपास रहने वाले लोगों ने देखा कि स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ गाड़ी लेकर फॉगिंग कर रहा है। घड़ी में तब सुबह के 11 से दोपहर के 12 बज रहे थे। PMC के नियम के हिसाब से रिहायशी इलाकों में यह काम सिर्फ सुबह 7 से 10 और शाम 5 से 8 बजे के बीच होना चाहिए। आरोप है कि कर्मचारी न तो सही वक्त का ध्यान रख रहे थे और न तय तरीके का।
लोगों ने मौके पर ही कर्मचारियों से पूछा कि यह किस वक्त की फॉगिंग है। जवाब से बात नहीं बनी तो वे सीधे अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर के पास पहुंच गए और शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और फॉगिंग बंद करवा दी गई। अब उस काम में लगे कर्मचारियों से भी और जिम्मेदार हेल्थ इंस्पेक्टरों से भी लिखित सफाई मांगी गई है।
PMC के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश दिघे का कहना है कि फॉगिंग के वक्त को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, "फॉगिंग का मुख्य मकसद बड़े यानी वयस्क मच्छरों को खत्म करना है। सुबह के वक्त लार्वा और अंडे नष्ट करने के लिए लार्वानाशक और ओविसाइडल केमिकल का छिड़काव किया जाता है। लेकिन वयस्क मच्छरों को खत्म करने वाली फॉगिंग संबंधित इलाकों में या तो सुबह या शाम को ही होनी चाहिए।"
डॉ. दिघे ने बताया कि जिस घर में डेंगू का पक्का केस मिलता है, वहां घर के भीतर और आसपास के हिस्से में मच्छर मारने के लिए स्प्रे किया जाता है। उन्होंने आगे कहा, "इन प्रक्रियाओं को लेकर सरकार की लिखित गाइडलाइन मौजूद हैं और स्टाफ को उसी हिसाब से ट्रेनिंग भी दी गई है। हालांकि झुग्गी इलाकों में, जहां घर एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं, वहां घरों के बीच की जगह में और सड़कों पर फॉगिंग की जाती है।"
महानगरपालिका के लिए यह चूक इसलिए और भी किरकिरी वाली है कि फॉगिंग पर वह पहले ही लगाम कस चुकी थी। पूरे शहर में रोज की फॉगिंग पर रोक लगने के बाद तय हुआ था कि यह काम ज्यादातर उन्हीं इलाकों में होगा, जहां डेंगू के मरीज मिले हैं। 23 अक्टूबर को अफसरों ने स्टाफ को साफ कहा था कि खुली जगहों पर बेवजह फॉगिंग न करें, और मरीज के घर के अंदर तथा उससे जुड़े बंद हिस्सों में 20 मिनट तक फॉगिंग करें।
शहर में डेंगू की हालत पर स्वास्थ्य विभाग प्रमुख डॉ. नीना बोराडे ने आंकड़े दिए। उनके मुताबिक इस साल 1 जनवरी से 20 अक्टूबर के बीच PMC क्षेत्र में डेंगू के 2,291 केस दर्ज हुए हैं। पहले यह संख्या 2,413 बताई गई थी, लेकिन दोबारा जांच में 122 एंट्रियां दोहरी निकलीं और हटा दी गईं। सबसे ज्यादा मरीज सितंबर में आए, यानी 662। अक्टूबर में डेंगू से दो मौतें दर्ज हुईं। इनमें लोहेगांव की एक बच्ची और गोखलेनगर की एक बुजुर्ग महिला हैं। कौर ने कहा कि बच्ची को दूसरी बीमारियां भी थीं।
अक्टूबर में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में भी PMC के इंतजामों पर सवाल उठे थे। सदस्यों ने कहा था कि फॉगिंग कम हो रही है और मरीजों के आंकड़े अधूरे हैं। इसके बाद कौर ने स्वास्थ्य अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और एक हफ्ते के अंदर पूरी रिपोर्ट देने को कहा।
कुल मिलाकर, डेंगू से जूझ रहे शहर में लोग उम्मीद कर रहे हैं कि फॉगिंग तय वक्त और तय तरीके से हो। अब नजर इस पर है कि हेल्थ इंस्पेक्टर और कर्मचारी अपने लिखित जवाब में क्या सफाई देते हैं और उस पर PMC क्या कदम उठाती है।
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