शनिवार, 7 नवंबर 2026

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ठाणे की अदालत ने 10 साल की बच्ची से तीन साल तक अत्याचार के दोषी 65 साल के चौकीदार को उम्रकैद दी

जुर्म PT24 अपराध डेस्क

कल्याण की विशेष अदालत ने उत्तम निकाळजे को आखिरी सांस तक कैद की सज़ा सुनाई और 50,000 रुपये जुर्माना भी लगाया।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने 65 साल के एक आदमी को 10 साल की बच्ची के साथ बार-बार यौन अत्याचार करने के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। यह सज़ा उसकी बाकी बची पूरी ज़िंदगी के लिए है। मामला तीन साल तक चले अत्याचार और बच्ची के गर्भवती होने से जुड़ा है।

कल्याण कोर्ट के विशेष न्यायाधीश लक्ष्मीकांत ए. बिडवई ने शुक्रवार, 6 नवंबर को फैसला सुनाया। दोषी का नाम उत्तम निकाळजे है, जो एक रिहायशी सोसायटी में चौकीदार का काम करता था। जज ने कहा कि उसने यह अपराध सालों तक "ठंडे दिमाग" से किया।

अदालत ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा पीड़ित बच्ची को आर्थिक मुआवज़ा देने की सिफारिश की गई है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह सिलसिला 2017 की गर्मियों में डोंबिवली में शुरू हुआ, जहां आरोपी सोसायटी में नौकरी करता था। अभियोजन का कहना है कि वह बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर इमारत की छत पर ले जाता था और बार-बार उसके साथ गंभीर यौन अत्याचार करता था। वह बच्ची को धमकाता भी था कि किसी को बताया तो अंजाम बुरा होगा।

शिकायत के मुताबिक मामला 20 फरवरी 2020 को सामने आया, जब कचरा उठाने वाले कर्मचारियों को कचरे के डिब्बे के पास काले कपड़े में लिपटा एक मृत नवजात मिला। इसके बाद केस दर्ज हुआ। जांच में पता चला कि बच्ची ने पेट में तेज़ दर्द की शिकायत की थी और उसे एक क्लिनिक और एक डायग्नोस्टिक सेंटर ले जाया गया था, जहां उसका प्राकृतिक गर्भपात हुआ।

आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

फैसला सुनाते वक्त अदालत ने यह भी नोट किया कि मुकदमे के दौरान विचाराधीन कैदी के तौर पर आरोपी गंभीर बीमारियों से जूझा और उसे अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा।

अदालत ने कहा, "यह मामला दुर्लभतम में से दुर्लभ नहीं है, इसलिए फांसी की सज़ा उचित नहीं है। ऐसे में आरोपी को उम्रकैद की सश्रम सज़ा देना न्यायसंगत और ठीक होगा। मैं साफ कर दूं कि POCSO कानून की धारा 6 को देखते हुए उम्रकैद का मतलब आरोपी की बाकी पूरी प्राकृतिक ज़िंदगी तक कैद है।"

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