मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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शिवसेना (UBT) बोली, 'चलो दिल्ली' रैली लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन की शुरुआत है

शिवसेना (UBT) बोली, 'चलो दिल्ली' रैली लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन की शुरुआत है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने संपादकीय में दिल्ली के रामलीला मैदान की विपक्षी रैली को बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया। भाजपा नेताओं ने आरोप खारिज किए हैं।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई विपक्ष की 'चलो दिल्ली' रैली को लोकतंत्र की बहाली के लिए चलने वाले बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया है। पार्टी का आरोप है कि सत्ता में बैठे लोग चुनाव से जुड़ी संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं।

पार्टी के मुखपत्र में छपे संपादकीय में उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि यह रैली कथित चुनावी गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट की खामियों के खिलाफ बुलाई गई थी। संपादकीय के मुताबिक इससे साफ दिखता है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार से लोगों की नाराजगी बढ़ रही है। रैली में INDIA गठबंधन की कई पार्टियों के नेता जुटे थे। विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट में हेराफेरी हुई है और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हैं।

संपादकीय का दावा है कि वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों का मुद्दा तब और जोर पकड़ गया, जब मौजूदा चुनाव आयुक्तों ने कुछ बातें सामने रखीं। संपादकीय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भी आलोचना की गई और आरोप लगाया गया कि वे केंद्र सरकार का पक्ष लेते हैं। पार्टी ने उन पर केंद्र सरकार के लिए "सुरक्षा कवच" का काम करने का आरोप लगाया और कहा कि इसी पक्षपात की वजह से किसी की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही।

संपादकीय में लिखा गया, "वोट चोरी अब राष्ट्रीय नारा बन गया है, यह जनता की घोषणा है। वोटर लिस्ट में घोटाले, करोड़ों मतदाताओं के नाम कटना और SIR की आड़ में मोदी और शाह की मदद के लिए काम करना अराजकता नहीं है। उलटे, यह मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार के पैदा किए भयानक हालात के खिलाफ जनता की बगावत है।"

संपादकीय का कहना है कि दिल्ली में भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग के बावजूद रैली में बड़ी भीड़ जुटी। उसके मुताबिक प्रदर्शनकारियों के रामलीला मैदान पहुंचने के दौरान बड़ी सड़कों पर जाम की खबरें थीं। पार्टी ने भाजपा नेताओं की भी आलोचना की, जो भीड़ को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उसका तर्क है कि यह जमावड़ा चुनाव के मुद्दों पर लोगों के भारी गुस्से को दिखाता है।

ठाकरे गुट ने इस रैली की राजनीतिक अहमियत की तुलना 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में चले लोकतंत्र समर्थक और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से की। संपादकीय के अनुसार रामलीला मैदान की यह भीड़ आपातकाल के दौर की उस ऐतिहासिक लामबंदी की याद दिलाती है, जब विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार को चुनौती दी थी। संपादकीय में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 2024 के लोकसभा चुनाव पर दिए बयान का भी जिक्र है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार अपना नैतिक जनादेश खो चुकी है और प्रशासन और संस्थाओं के सहारे सत्ता में टिकी हुई है।

उधर भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। संपादकीय में बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'चलो दिल्ली' की लामबंदी की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक अराजकता फैलाने की कोशिश कहा। शाह ने मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव भी किया। उनका कहना था कि विपक्ष अवैध घुसपैठियों को बचाना चाहता है। संपादकीय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेताओं पर छोटे राजनीतिक फायदे के लिए देश को बांटने की कोशिश का आरोप लगाया था।

शिवसेना (UBT) के संपादकीय ने सरकार की इस दलील को नकार दिया। उसने सवाल उठाया कि कई राज्यों में जिन मतदाताओं के नाम काटे गए, उन्हें विदेशी नागरिक कैसे कहा जा सकता है।

संपादकीय के अंत में कहा गया कि कथित चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्ष के अभियान में यह रैली एक मोड़ साबित हुई है। पार्टी का कहना है कि यह जमावड़ा संविधान की मर्यादा और चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही की बढ़ती मांग को दिखाता है।

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