डोंबिवली के कोपर गणेश घाट पर सौ साल से ज्यादा बाद दिखा दुर्लभ साइक्स नाइटजार
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
उत्तर-पश्चिम भारत के सूखे इलाकों में मिलने वाली यह चिड़िया 29 अक्टूबर को डोंबिवली में नजर आई।
डोंबिवली के कोपर गणेश घाट पर साइक्स नाइटजार दिखने की खबर से पक्षी प्रेमियों में उत्साह है। यह चिड़िया आम तौर पर उत्तर-पश्चिम भारत के सूखे इलाकों में मिलती है। डोंबिवली के पक्षी प्रेमियों ने इसे 29 अक्टूबर को देखा। अगर यह दर्ज हो जाता है, तो इस इलाके में इस प्रजाति का सौ साल से ज्यादा वक्त बाद पहला रिकॉर्ड होगा और क्षेत्र के पक्षी रिकॉर्ड में एक अहम नाम जुड़ जाएगा।
वाइल्डलाइफ के शौकीन प्रशांत भगत ने सुबह करीब 8.45 बजे इसे देखा। उनके साथ दूसरे पक्षी प्रेमी मिलिंद गणात्रा भी थे। शुरू में दोनों को लगा कि यह कॉमन स्नाइप है। लेकिन जब उन्होंने इसकी उड़ान को गौर से देखा, तो उन्हें शक हुआ कि यह नाइटजार हो सकता है। उड़ान का तरीका इसी तरफ इशारा कर रहा था।
इसकी तस्वीरें लेना आसान नहीं था। चिड़िया शर्मीली है और अपने आसपास में बहुत अच्छी तरह घुल-मिल जाती है। यह ऊंची घास में चली गई। काफी कोशिश के बाद पक्षी प्रेमी ऐसी तस्वीरें खींच पाए, जिनसे इसकी पहचान पक्की हो सकी। बाद में जानकारों ने इसे साइक्स नाइटजार बताया।
भगत के मुताबिक उन्होंने तस्वीरें eBird पर अपलोड कीं। यह अमेरिका की कॉर्नेल लैब ऑफ ऑर्निथोलॉजी का चलाया हुआ पक्षियों के रिकॉर्ड का वैश्विक प्लेटफॉर्म है। उसी दिन eBird के एक रिव्यूअर ने इस दर्ज को जांचकर मंजूर कर दिया, जिससे उनके दावे पर भरोसा और बढ़ गया।
इस प्रजाति का इलाके में पुराना रिकॉर्ड देखें तो यह सुनहरा मौका है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर 1915 में कल्याण में कहीं से एक मादा साइक्स नाइटजार का नमूना जमा किया गया था। उसके बाद जनवरी 2019 में भांडुप पंपिंग स्टेशन पर वाइल्डलाइफ प्रेमी और पक्षी निरीक्षक अक्षय शिंदे ने इसे देखा। यानी सौ साल से ज्यादा के फासले के बाद यह दर्ज हुआ था।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में यह प्रजाति Least Concern श्रेणी में आती है। डोंबिवली में इसका दिखना बताता है कि पक्षियों को देखने पर उसे दर्ज करना और उनके फैलाव में आने वाले बदलाव पर नजर रखना कितना जरूरी है।
इसे सिंध नाइटजार भी कहा जाता है। यह गुजरात और राजस्थान में आम है और सूखी, खुली झाड़ियों वाली जमीन में रहती है। महाराष्ट्र में इंडियन नाइटजार और सवाना नाइटजार यहीं के बाशिंदे हैं, जबकि साइक्स नाइटजार मुंबई महानगर क्षेत्र में कभी-कभार आने वाला मेहमान है।
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