बुधवार, 4 नवंबर 2026

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सातारा: ग्रामपंचायतों की जांच में लापरवाही की तो कारवाई, जनहक्क समिति की चेतावनी

सातारा: ग्रामपंचायतों की जांच में लापरवाही की तो कारवाई, जनहक्क समिति की चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

सातारा जिले की ग्रामपंचायतों के कामकाज पर जनहक्क समिति ने नजर रखने का फैसला किया है, और नियमित जांच न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

महाराष्ट्र लेखा संहिता 2011 के नियमों के मुताबिक ग्रामपंचायतों में बढ़ते भ्रष्टाचार, विकास कामों की बदहाली और आर्थिक गड़बड़ियों को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को ग्रामपंचायतों की नियमित और गहराई से जांच करनी ही चाहिए। इसके लिए अब जिले के सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं की जनहक्क समिति नजर रखेगी, ऐसा सामाजिक कार्यकर्ता सुशांत मोरे ने बताया है।

महाराष्ट्र ग्रामपंचायत लेखा संहिता 2011 के नियम 80 और महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम की धारा 140 के तहत ये जांचें अनिवार्य हैं, लेकिन असल में अधिकारी इस जांच को नजरअंदाज करते हैं। बिना गहराई से जांच किए सिर्फ रिकॉर्ड पर दस्तखत कर दिए जाते हैं, ऐसा आरोप जनहक्क समिती के महारुद्र तिकुंडे ने लगाया है।

राज्य में करीब 14 हजार से ज्यादा और सातारा जिले में 700 से ज्यादा ग्रामपंचायतों की कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद राज्य सरकार 6 महीने में चुनाव नहीं करा पाई। पहले 6 महीने मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक बनाया गया। इसके बाद दोबारा चुनाव कराने की कोशिश करने के बजाय विस्तार अधिकारी दर्जे के अधिकारियों को ग्रामपंचायत पर प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसमें ग्रामपंचायत विस्तार अधिकारियों के साथ-साथ ग्रामपंचायत के कामकाज और कानूनी जानकारी न रखने वाले दूसरे विभागों के अधिकारियों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। ग्रामपंचायत का कामकाज टाइमपास नहीं बल्कि कानूनी जिम्मेदारी है, इसलिए इसे सक्षमता से निभाना चाहिए। इसके लिए जिले के जनहक्क समिती के सभी कार्यकर्ता इस पर नजर रखेंगे, ऐसा कैलास कुंभार ने बताया।

प्रशासक राजवट में फंड की बर्बादी न हो, इसके लिए अधिकारी जिम्मेदारी से पीछे न हटें, इसके लिए जनहक्क समिती अब सूचना अधिकार का इस्तेमाल करेगी, ऐसा भरत रावळ ने बताया। साथ ही, नियमित जांच न करने वाले और अपने काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सीधे प्रशासकीय कार्रवाई की मांग पर अड़े रहने की चेतावनी कार्यकर्ता शिवाजी जाधव ने दी है। वरिष्ठ अधिकारी अगर समय-समय पर ईमानदारी से जांच और पूरा मार्गदर्शन करें, तो ग्रामपंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, ऐसा भरोसा जनहक्क समिती के राजेंद्र गायकवाड और गणेश वाघमारे ने जताया है।

लेखा संहिता के मुताबिक जांच का पूरा तरीका भी तय है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर साल हर पंचायत समिती में कम से कम एक ग्रामपंचायत की जांच करते हैं। वहीं उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी को हर साल पंचायत समिती क्षेत्र की कम से कम 5 ग्रामपंचायतों की जांच करनी होती है। गटविकास अधिकारी को हर महीने 5 ग्रामपंचायतों की गहराई से और 5 ग्रामपंचायतों की सामान्य जांच करनी चाहिए। विस्तार अधिकारियों को हर महीने अपने कार्यक्षेत्र की 10 ग्रामपंचायतों की बारी-बारी से गहराई से जांच करनी होती है।

विस्तार अधिकारियों को हर महीने 10 ग्रामपंचायतों की गहराई से जांच करते समय 7 पन्नों के नमूने में रिपोर्ट देना अनिवार्य है। इसमें ग्रामपंचायत का हर आर्थिक लेनदेन, विकास कामों की मौके पर जाकर जांच, ग्रामसभा और मासिक बैठक के प्रस्तावों का असली अमल, साथ ही जमा-खर्च और बकाया रकम का हिसाब जांचना जरूरी होता है। इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए सूचना अधिकार का सहारा लिया जाएगा, यह बात कार्यकर्ता गणेश अहिवळे और महेश शिवदास ने साफ की है।

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