नागपुर मनपा सभा में डिजिटल वर्क्स मॉड्यूल पर हंगामा, महापौर ने अफसरों को दी सख्त हिदायत
नागपुर महानगरपालिका की आम सभा में नए वर्क्स मॉड्यूल पर पार्षदों का गुस्सा फूटा, महापौर नीता ठाकरे ने फाइलों के निपटारे की समयसीमा तय करने का आदेश दिया।
नागपुर महानगरपालिका की आम सभा में इस बार नया डिजिटल 'वर्क्स मॉड्यूल' सिस्टम बहस के केंद्र में रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ के पार्षदों ने प्रशासन को जमकर घेरा और अफसरशाही की जमकर खिंचाई की।
पार्षदों का कहना था कि जिस ऑनलाइन सिस्टम को विकास कार्यों में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए शुरू किया गया था, वही अब विकास के काम में सबसे बड़ी अड़चन बन गया है। वाडों से जुड़ी फाइलें जूनियर इंजीनियर, उप अभियंता और कार्यकारी अभियंताओं की टेबल पर हफ्तों तक पड़ी रहती हैं, आगे नहीं बढ़तीं।
सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई, जिसके बाद महापौर ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए। महापौर ने आदेश दिया कि हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और फाइलों के निपटारे के लिए समयसीमा तय की जाए। विपक्ष के नेता संजय महाकालकर ने नोटिस के जरिए यह अहम मुद्दा सदन में उठाया।
सवालों का जवाब देते हुए अतिरिक्त आयुक्त मुरुगानंथम ने साफ किया कि वर्क्स मॉड्यूल के लिए किसी अलग एजेंसी को नया भुगतान नहीं किया गया है। यह मॉड्यूल साल 2023 से 2029 तक नागपुर मनपा के पूरे आईटी और सॉफ्टवेयर रखरखाव के लिए हुए करार के तहत ही तैयार हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती एक महीना कर्मचारियों की ट्रेनिंग में ही निकल गया, और वाटर वर्क्स जैसे विभागों में लाखों आइटम होने की वजह से तकनीकी दिक्कतें आईं, जिन्हें अब काफी हद तक ठीक कर लिया गया है।
चर्चा में सदस्यों ने कहा कि 160 पार्षदों के प्रभागों में सीवरलाइन, चैंबर और गटर जैसे आपातकालीन काम फाइलों की देरी के चलते अटके पड़े हैं। पार्षदों ने मांग रखी कि जेई से लेकर अतिरिक्त आयुक्त तक, हर अफसर के पास फाइल रुकने की अधिकतम मियाद तय हो, और तय समय में फाइल आगे न बढ़े तो सिस्टम में खुद-ब-खुद एस्केलेशन हो जाए। साथ ही पार्षदों को फाइलों की रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए टैब और जरूरी डिजिटल उपकरण जल्द मुहैया कराने की मांग भी उठी।
बहस के आखिर में महापौर नीता ठाकरे ने पार्षदों की चिंता को सही ठहराते हुए आयुक्त और प्रशासन को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी व्यवस्था को आसान बनाने के लिए लाई गई है, जनता के काम रोकने के लिए नहीं। महापौर ने कहा कि किस स्तर पर, जैसे जेई, उप अभियंता, ईई, एसई या चीफ इंजीनियर, फाइल कितने दिन रुकेगी, इसका साफ परिपत्र फौरन जारी किया जाए, और बेवजह फाइल पेंडिंग रखने वाले अफसरों की जिम्मेदारी तय कर उन पर कार्रवाई की जाए।
चर्चा की शुरुआत करते हुए महाकालकर ने कहा कि वर्क्स मॉड्यूल लागू होने के बाद से विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। नेहरूनगर सहित अलग-अलग जोनों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक ही फाइल दर, साइट विजिट या स्टैंडर्ड फॉर्मेट में मामूली अंतर बताकर 2-3 बार वापस लौटा दी जाती है, और जोनों में तैनात सहायक आयुक्त व कार्यकारी अभियंता फाइलों को आगे बढ़ाने में लापरवाही बरत रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 अगस्त को दिए गए प्रस्तावों को सितंबर तक भी प्रशासनिक मान्यता नहीं मिल पाई है। पार्षद अभिजीत झा ने सवाल उठाया कि जब एनएमसी ई-गवर्नेंस पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो अफसरों के लिए अधिकतम 24 घंटे या तय समयावधि का नियम अनिवार्य क्यों नहीं किया जा रहा।