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15:28 IST

महाराष्ट्र की नई पथविक्रेता नीति सामने, नागपुर टीवीसी बैठक सुझावों के लिए स्थगित

राज्य सरकार की महाराष्ट्र पथविक्रेता योजना 2026 का मसौदा नागपुर में टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में रखा गया, सर्वेक्षण पूरा होने तक हॉकर्स को नहीं हटाने का प्रावधान।

महाराष्ट्र की नई पथविक्रेता नीति सामने, नागपुर टीवीसी बैठक सुझावों के लिए स्थगित
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर में गुरुवार को मनपा मुख्यालय में टाउन वेंडिंग कमेटी यानी टीवीसी की बैठक हुई, जिसमें राज्य सरकार की नई स्ट्रीट वेंडर्स पॉलिसी सामने रखी गई। बैठक में टीवीसी के सदस्य और हॉकर्स यूनियन के महासचिव अब्दुल रज्जाक कुरेशी ने पॉलिसी का अध्ययन करने और उस पर सुझाव देने के लिए समय मांगा, जिसके बाद बैठक स्थगित कर दी गई।

प्रशासन के मुताबिक नई स्ट्रीट वेंडर्स पॉलिसी पर 30 सितंबर तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद पॉलिसी को मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। यह पॉलिसी पूरे महाराष्ट्र में एक जैसी लागू होगी।

राज्य के नगर विकास विभाग ने फेरीवालों की आजीविका बचाने और उनके व्यवसाय को नियमित करने के लिए 'महाराष्ट्र पथविक्रेता योजना, 2026' का मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्तावित नीति का मकसद राज्यभर के फेरीवालों को कानूनी सुरक्षा देना, उनके धंधे के लिए अनुकूल माहौल बनाना और शहरों में व्यवस्थित वेंडिंग जोन तैयार करना है।

नए मसौदे के मुताबिक जब तक सभी फेरीवालों का विस्तृत सर्वे पूरा नहीं होता और पात्र वेंडर्स को बिक्री प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी फेरीवाले को हटाया नहीं जाएगा। टीवीसी की निगरानी में 6 महीने के भीतर बड़ा डिजिटल सर्वे शुरू होगा और इसे 3 महीने में पूरा करना होगा। डेटा दोहराव रोकने के लिए मोबाइल एप, ओटीपी और बायोमेट्रिक सिस्टम इस्तेमाल होगा। फिक्स स्टॉल्स की जियो टैगिंग और मोबाइल वेंडर्स की जियो-फेंसिंग की जाएगी। पहले सर्वे के बाद हर 5 साल में दोबारा सर्वे होगा।

नागपुर जिले में जिन बाजारों में फेरीवाले 50 साल से ज्यादा समय से धंधा कर रहे हैं, उन्हें 'पारंपरिक बाजार' यानी हेरिटेज मार्केट घोषित किया जाएगा और वहां से वेंडर्स को नहीं हटाया जाएगा। मंत्रालय, विधान भवन, हाई कोर्ट, कलेक्टोरेट, पुलिस कमिश्नरेट और सामान्य अस्पतालों के गेट से 100 मीटर, रेलवे स्टेशनों से 150 मीटर तथा रेलवे क्रॉसिंग और बस स्टैंड से 100 मीटर के दायरे में फेरी लगाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

अगर किसी फेरीवाले का प्रमाणपत्र रद्द होता है तो उसे जगह खाली करने के लिए 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा। समय पर जगह खाली न करने पर 250 रुपये प्रतिदिन तक जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के छोटे-मोटे उल्लंघन पर प्रमाणपत्र रद्द करने की बजाय 2000 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

बिना इजाजत बिक्री करते पकड़े जाने पर जब्त की गई खराब होने वाली सामग्री के लिए उसी दिन और बाकी सामान के लिए 3 दिनों के भीतर दावा करना होगा। दावा करने पर नाशवान सामान 24 घंटे में और अन्य सामान 2 कार्यदिवसों में जुर्माना भरने के बाद लौटा दिया जाएगा। योजना को पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए हर 2 साल में गैर सरकारी संगठनों यानी एनजीओ के जरिए 'सोशल ऑडिट' भी कराया जाएगा।

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