शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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सूखे के बीच राज्य सरकार ने वृक्षारोपण की देखभाल के लिए 90.72 लाख रुपये मंजूर किए

सूखे के बीच राज्य सरकार ने वृक्षारोपण की देखभाल के लिए 90.72 लाख रुपये मंजूर किए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

राजस्व और वन विभाग के GR के मुताबिक पैसा तभी जारी होगा जब पौधों के बचने की दर कम से कम 90 प्रतिशत हो।

महाराष्ट्र सरकार ने 2026-27 के लिए पूरे राज्य में लगाए गए पौधों की देखभाल के लिए 90.72 लाख रुपये मंजूर किए हैं। पैसा तभी जारी होगा जब पौधों के जीवित रहने की दर कम से कम 90 प्रतिशत हो। यह शर्त जरूरी रखी गई है।

यह रकम ऐसे वक्त आई है जब राज्य के 358 तालुकाओं में से 304 को इस साल कम बारिश के बाद सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। इससे पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है।

राजस्व और वन विभाग ने गुरुवार को एक सरकारी आदेश (GR) जारी किया। इसके मुताबिक यह पैसा राज्य की वनीकरण योजना के पंचायत वन, बेल वन और अमृत वन हिस्सों के तहत लगे पौधों की चौथे साल की देखभाल पर खर्च होगा। ये पौधे अलग-अलग जिलों में 227 हेक्टेयर में फैले हैं।

सबसे ज्यादा 42.80 लाख रुपये पुणे वन सर्कल को मिले हैं। इसके बाद नागपुर को 20.80 लाख रुपये और छत्रपति संभाजीनगर को 20.76 लाख रुपये दिए गए हैं।

GR में साफ लिखा है कि पैसा सिर्फ उन्हीं जगहों के लिए जारी होगा जहां कम से कम 90 प्रतिशत पौधे बचे हैं। देखभाल, सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की होगी।

अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (बजट, नियोजन और विकास), महाराष्ट्र को निर्देश दिया गया है कि तय शर्तों का पालन करवाएं। साथ ही जारी रकम का उपयोगिता प्रमाणपत्र सात दिन के भीतर जमा करें।

सोमवार को सरकार ने इन्हीं 304 तालुकाओं में मिट्टी और जल संरक्षण के कामों का आदेश भी दिया था। इन तालुकाओं में 2026 के खरीफ सीजन में सूखे से जुड़े ट्रिगर लागू हुए थे। कामों में पानी सोखने वाले गड्ढे बनाना, जलाशयों की गाद निकालना और चेक डैम की मरम्मत शामिल है।

राज्य ने यह वनीकरण पहल 2023 में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू की थी, जो भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर मनाया गया। इसका मकसद शहरी और ग्रामीण इलाकों के साथ धार्मिक स्थलों पर भी हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण का संतुलन मजबूत करना है।

पहल के तीन हिस्से हैं: अमृत वन, पंचायत वन और बेल वन। ये क्रमशः शहरी केंद्रों, गांवों और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर केंद्रित हैं।

अमृत वन में 75 बड़े शहरों और अहम शहरी केंद्रों में स्थानीय निकायों या वन विभाग की जमीन पर देसी प्रजातियों के पेड़ों से खास शहरी वन उद्यान बनाने का लक्ष्य है। पंचायत वन के तहत हर जिले के 25 चुने हुए गांवों में वन समूह तैयार होने हैं। हर समूह में सांस्कृतिक रूप से अहम और पारिस्थितिकी के हिसाब से ठीक पांच प्रजातियों के पेड़ होंगे, ताकि जैव विविधता बढ़े।

बेल वन में महाराष्ट्र के 75 प्रमुख तीर्थ और धार्मिक स्थलों पर पौधारोपण होता है। इनमें बेल, सीता अशोक, रुद्राक्ष, बेर और स्वस्तिक जैसे पवित्र और औषधीय पौधे शामिल हैं। इस तरह पर्यावरण संरक्षण को राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ा गया है।

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